Wednesday, November 11, 2020

भारत पाक के आपसी संबंधों का मधुर बनाने में सार्थक सिद्ध होगा श्री करतारपुर साहिब का कोरिडोर


अमृतसर
गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के  लिए भारत व पाकिस्तान सरकारों की ओर से संगत के लिए रास्ता खोलना एक इतिहासिक फैसला है। यह रास्ता दोनों देशों के मध्य आपसी भाईचारा व प्रेम बढाने वाला रास्ता है। इस रास्ते के खुलने से दुनिया भर के सिखों में खुशी की लहार पैदा हुई। यह रास्ता एशिया के इस भूभाग में अमनशांति का संदेश देना वाला है वहीं यह दुनिया भर के सिखों को अपने गुरु साहिब के पावन स्थान के दर्शन करने के लिए आने जाने की सुविधा देना वाला एक इतिहासिक रास्ता है। यह रास्ता आने वाले समय में भारत पाक के रिशतों में यहा अधिक मजबूरी और मधुरता लाएगा वहीं दोनों देशों के लोगों में आपसी भाई चारे को मजबूत करने वाला सिद्ध होगा। करतारपुर का कोरिडोर खुलने से वह सिख संगत भी असानी से अपने गुरु साहिब के साथ संबंधित स्थान के दर्शन कर सकेगी जो संगत करतारपुर साहिब के दर्शन करना चाहती थी परंतु कई तरकनीकी कारणों के कारण दर्शन करने से वंचित रह जाती थी। यह रास्ता धार्मिक सद्दभावना को बढावा देने वाला है और दुनिया भर में रहने वाले सिखों को अपने मुकदस धार्मिक स्थान के दर्शनों की प्यास बुझाने वाला है। दुनिया भर से लाखों सिख श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक होने के लिए आते है। भारत में यहां वह अलग अलग तख्त साहिबों के दर्शन करते है वहीं उनकी यह भी इच्छा रहती थी कि वह पाकिस्तान स्थित गुरु साहिब के साथ संबंधित स्थानों के भी खुले दर्शन दीदार कर सकें। यह कोरिडोर दुनिया भर के करोडों सिखों की अध्यात्मिक  इच्छा पूर्ती करने वाला एतिहासिक रास्ता है।
सिख संगत वर्षों से अपने गुरुघामों के खुले दर्शन दीदार के लिए अरदास करती आ रही है। वाहेगुरु की मेहर के चलते सिख संगतों की आवाज पर दोनों देशों की सरकारों ने कोरिडोर खोलने का फैसला लिया जिस का दुनिया के हर सिख ने स्वागत किया है। दोनों देशों की सरकारों को चाहिए कि सिख कौम की धार्मिक भावनाओं को मुख्य रखते हुए इस रास्ता के माध्यम से संगत के आने व जाने के लिए वीजा व अन्य शर्तों को और अधिक नरम करना चाहिए। वहीं इस करतार पुर साहिब जाने के लिए फीस को भी नामात्र ही करना चाहिए। ताकि हर सिख माई भाई अपने गुरु साहिब के साथ संबंधित पवित्र स्थान करतारपुर साहिब के दर्शन कर सके। समय समय पर कुछ कारणों से जब रास्ता बंद होता है वह भी बंद नही होने चाहिए। इस के लिए दोनों देशों की सरकारों को कोई ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि रास्त बंद करने की जरूरत न पडे । संगत अधिक से अधिक संख्या में इस रास्ता के माध्यम से धार्मिक स्थानों के दर्शन कर सके। इस की भी ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। संगत की सुविधा के मौके पर ही आने जाने की सुविधा हो। अगर दोनो देशों की सरकारें अधिक से अधिक सुविधाएं इस रास्ते के माध्यम से संगत को प्रदान करती है तो यह रास्ता एक शांति व आपसी भाईचारे व संबंधों को मजबूत बनाने वाला रास्थ भविष्य में साबित होगा। जिस से दोनों देशों के आपसी संबंधों का सुनहरा इतिहास लिखा जा सकेगा।
— भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल
अध्यक्ष
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी 

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