Friday, March 18, 2022

पाकिस्तान में सुरक्षित नही है हिन्दू धर्म के लोग: एनपीएफ

अमृतसर

नेशनल पीप्लुस फ्रंट एनपीएफ ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जिला थारपारकर के गांव जोगलर में कुछ कट्टरपंथियों की ओर से एक हिन्दू परिवार के घर को जलाने की सख्त शब्दों में निंदा की है। कहा कि पाकिस्तान में अल्पंसख्यक हिन्दू सुरक्षित नही है। इस लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को अल्पंसख्यक विरोधी राष्ट्र घोषित करे। इस को लेकर एनपीएफ की ओर से यूएनओ के महासचिव को पत्र भेजा जाएगा।
एनपीएफ के जिला अध्यक्ष एडवोकेट कुलदीपक मेहता ने कहा कि पाकिस्तान में हिन्दुओं के मानवीय अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। जोगलर गांव में जिस हिन्दु परिवार के घर को आग लगाई गई उस के बाद उस परिवार को गांव से बाहर निकाल दिया गया। जो कि अति निंदनीय घटना है। पाकिस्तान का आल्पसंख्यक म़ंत्रालय की इस मामले में चुप्पी भी कई तरह के सवाल पैदा कर रही है। इतना ही नही इस घटना की वहां के कट्टरपंथियों और इंसानियत विरोधी शक्तियों की ओर से वीडियों भी जारी करके मानवता का खुलेआम मजाक उडाया गया है। इस अवसर पर पार्टी के विद्यार्थी संगठन नेशनल स्टूडेंट्स फेडरेशन के जिला अध्यक्ष ठाकुर विजय सिंह और विकास बेरी आदि भी मौजूद थे।
— पंकज शर्मा

श्री ननकाना साहिब के प्राचीन व नुकसाने हुए स्वरूपों के क्यों शताब्दी समारोहों पर संगत कर सकेगी दर्शन!

— आजादी के बाद आज तक चल रही है इस स्वरूपों की संभाल के लिए सेवा

साका ननकाना साहिब की शताब्दी इस बार भव्य रूप में मनाई जा रही है। शिरोमाणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी और पाकिस्तान सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटियां  21 फरवरी 2021 को साका की शताब्दी  मनाएगी। इस दौरान आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लने वाली संगत को प्रचीन पावन स्वरूपों के दर्शन भी हो सकेंगे या नही यह सवाल आज संगत की चर्चा में है।  समय के पंथ विरोधियों की ओर से नुकसान किए गए स्वरूपों के दर्शन संगत करना चाहती है। इस की मांग लम्बे समय से उठाई जा रही है।  
श्री गुरु नानक देव जी के जन्म स्थान गुरुद्वारा ननकाना साहिब पाकिस्तान को महंत नारायण दास से प्रबंधक छुड़वाने के लिए भाई लछमन दास धारोवाली समेत सैंकडों सिंघों ने शहीदिया प्राप्त की थी। इस दौरान कुछ स्वरूपों का नुकसान भी हुआ था। नुकसाने गए स्वरूपों की सेवा 14 फरवरी 2014 को कार सेवा लंगर नादेड साहिब वालों को सौंपी गई थी। उनकी ओर से इस सेवा का काम दिसंबर 2018 को मुकम्मल कर लिया गया था। इस के बाद अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरमुख सिंह की ओरसे भी इन पावन स्वरूपों की सेवा दोबारा की थी। जो अभी भी चल रही है। इन स्वरूपों की सेवा आज भी श्री अकाल तख्त साहिब के उपर स्थित कमरों में कारीगरों की ओर से की जा रही है। जो अभी तक मुकमम्मल नही की गई है।
उल्लेखनीय है कि इन स्वरूपों को एसजीपीसी देश के बंटवारे के बाद ननकाना साहिब से अमृतसर ले आई थी। स्वरूपों की संभाल सही ढंग से न होने के कारण इस के पन्ने भुरने शुरू हो गए थे। इन की सेवा नादेड सााहिब वाले बाबा बलविंदर सिंह और नरिंदर सिंह को सौंपी गई थी। इन स्वरूपों की सभाल के लिए बाद में एक कारीगर अमृतसर सिंह राणा को भी तैनात किया गया था। अभी तक इन स्वरूपों की जिल्दबंदी भी नही हुई है।

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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि स्वरूपों की चल रही सेवा जल्दी मुकम्मल करने के लिए कहा गया है। साका ननकाना साहिब के साके के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में संगत इन स्वरूपों के दर्शन कर सके। इस लिए सेवा समय पर मुकम्मल करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहाकि स्वरूपों पर संघर्ष करने वाले भाई लछमन सिंह धारोवाली के खून के निशान भी मौजूद है।
— पंकज शर्मा

बदलते मौसम को मुख्य रख गर्मी का मुकाबला करने के लिए आंदोलनकारी किसानों ने तैयार की आधुनिक सुविधा युक्त ट्रालियां


— गर्मी व मच्छरों से बचाव होगा इन जगाडू ढंग से तैयार की ट्रालियां
पंकज शर्मा , अमृतसर
केंद्र सरकार और किसान जत्थेबंदियों के मध्य कृषि कानूनों को लेकर चल रहे हठ वाले व्यवहार के कारण दिल्ली बार्डर पर चल रहा आंदोलन लम्बा चलने की संभावना है। पहले ठिठुरती सर्दी का मुकाबला करते हुए किसानों ने दिल्ली बार्डर पर आंदोलन को जमाए रखा। अब गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है। इस मौसम भी आंदोलन मौसम की चुनौतियों का मुकाबला करते हुए जारी रखने के लिए किसानों ने आवश्यक प्रबंध शुरू कर दिए है। सर्दी के मौसम में यहां सर्दी से बचाव के लिए सभी प्रबंध किसानों ने किए थे वहीं अब गर्मी का मुकाबला करने के लिए ट्रालियों को अति आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की जगाड़ू व्यवस्था करनी शुरू कर दी है।
जिले के गांव कत्थनंगल के गुरलाल सिंह जो किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सक्रिया सदस्य है ने गर्मी के मौसम में मच्छरों व मक्खियों आदि से बचाव के लिए अपनी ट्राली को आधुनिक सुविधाओं वाली ट्राली के रूप में तैयार किया है। गुरलाल सिंह ने बताया कि वह पहले भी तीन बार जत्थों के साथ अपनी ट्राली लेकर दिल्ली जा चुका है। पहली बार वह 18 दिन धरने में रह कर आया है दूसरी बार वह 25 दिन रह कर आया था। वहां रात्रि के समय जो मुश्किलें आती है उसको मुख्य रख उसने अपनी 17 फुट वाली ट्राली को माडीफाई किया है। ट्राली की छत को बडियां टीनों वाली बनाया गया है। ट्राली के चारों को मच्छर आदि के प्रवेश को रोकने के लिए बरीक जाली लगाई गई है। ट्राली को एक बढिया कमरे के रूप में तैयार किया गया है। जिस में एक छत वाले पंखे , एक एक्सजास्ट फैन, एक फ्राटा फैन आदि की व्यवस्था की गई थी। वहीं इस ट्राली में 7 प्लग की व्यवस्था की गई है। अंदर और बाहर चारों और एईडी बल्ब लगाने के आठ प्वाइंट की भी व्यवस्था की गई है। अंदर एलसीडी टीवी लगाने की भी व्यवस्था है। रात्रि को ट्राली रूपी आधुनिक कमरे में 15 के करीब व्यक्ति आराम से बिना किसी मुश्किल सो सकते है। अन्यों के लिए फोल्डिंग बैड, मच्छर दानियों आदि की भी व्यवस्था की गई है। ट्राली रूपी कमरे के अंदर मासक्यूट रैपलेंट लगाने के लिए भी अलग से प्लग प्वाइंट की व्यवस्था की गई है। ट्राली एक रूम की तरह बंद है। हवा आने के लिए उसमें जालियां और खिडकी आदि की व्यवस्था की गई है। ट्राली का बैक डाला बंद कर दिया गया है। बैक में ट्राली के अंदर व बाहर जाने के लिए एक दरवाजे की और उतरे व चढ़ने के लिए सीढियों की व्यवस्था भी की गई है। ट्राली के अंदर सोने की बढियां व्यवस्था की गई है। बढियां क्वालिटी के मैप आदि भी अंदर लगाए गए है। हमने ट्राली को एक रूम का रूप देकर एक माडल , आंदोलन में हिस्सा लेने वाले अन्य किसानों को दिया है ताकि वह भी मौसम के बदलाव को मुख्य रख अपनी अपनी ट्रालियों में यह आधुनिक सुविधाएं स्थापित कर के आंदोलनकारी किसानों को सुविधांएं प्रदान कर सकें।
— पंकज शर्मा

अमृतसर पहुंचे सांपला को हरिमंदिर साहिब व रामतीर्थ में करना पड़ा विरोध का सामना


— जोशी और मलिक को भी घेरा किसानों ने
अमृतसर
अनुसूचित जाति कमिशन के चेयरमैन बनने के बाद पहली बार श्री हरिमंदिर साहिब माथा टेकने पहुंचे विजय सांपला को विदेश से आए एक युवक के विरोध कर सामना करना पड़ा। परंतु विजय सांपला ने जब युवक सुरजीत सिंह के किसानी कानूनों के मुद्दे पर पूछे सवाल का सार्थक जवाब न दिया तो उसने सांपला का परिक्रमा में विरोध किया। सांपला के साथ आए सुरक्षा कर्मियों ने उसे पकड़ कर खींचते हुए पीछे हटा दिया और सांपला श्री हरिमंदिर साहिब माथा टेकने चले गए। श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे सांपला को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से सूचना केंद्र में सम्मानित भी नहीं किया । विजय सांपला का विरोध किसानों की ओर से राम तीर्थ माथा टेकने के दौरान भी किया। इसी तरह भाजपा के पूर्व राज्य अध्यक्ष श्वेत मलिक को भी किसानों का रेलवे स्टेशन पर पत्रकार वार्ता के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा। रामतीर्थ पहुंचे भाजपा के पूर्व केबिनेट मंत्री अनिल जोशी की गाड़ी भी किसानों ने वहां रोक ली। जोशी को किसानों ने कृषि मुद्दों पर उनके सवालों का जवाब देने के लिए मजबूर किया।
विजय सांपला जैसे ही श्री हरिमंदिर साहिब परिक्रमा से वीआईपी रास्ते से श्री हरिमंदिर साहिब माथा टेकने जाने लगे तो संगत में से सुरजीत सिंह निवासी गांव  रामतीर्थ , तलवंडी साबो जिला बठिंडा जो आज कल अस्ट्रेलिया का पीआर है ने सांपला से प्रश्न किया कि किसानी कानूनों को लेकर उनकी और सरकार की क्या प्रतिक्रिया है। इस के जवाब में सांपला ने कहा कि वह एससी कमिशन की संविधायक पोस्ट पर है। वह इस सवाल का जवाब देने के लिए निर्धारित नही है। इस पर सुरजीत ने सांपला का विरोध किया। युवक ने यह भी कहा कि सांपाल को वीआईपी रास्ते से एसजीपीसी के अधिकारी क्यों माथा टेकने के लिए लेकर जा रहे है। इसी दौरान सांपला के सुरक्षा कर्मियों ने उसे खींच कर पीछे हटा दिया। युवक्त ने बताया कि व पंजाब विश्वविद्यालय में छात्र संगठन सोपू का नेता रह चुका है। वर्ष 2009 — 2012 में उसने पीयू से एलएलबी की और अब वह अस्ट्रेलिया का पीआर है। नवंबर में वह भारत आया था और दिल्ली में चल रहे किसानी मोर्चे में वह लगातार आंदोलन में हिस्सा ले रहा है। उसने कहा कि जो सरकार जनता के सवालों का जवाब नहीं दे रही है वह लोकतांत्रिक सरकार नहीं बल्कि तानाशाही वाली सरकार है। 200 से अधिक किसान मारे जा चुके है केंद्र सरकार कोई भी जवाब नही दे रही है।
सांपला जब राम तीर्थ माथा टेकने पहुंचे तो वहा किसान नेता बचित्तर सिंह के नेतृत्व में किसानों के ग्रुप ने सांपला के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनकी गाडी रोकने की कोशिश की। परंतु सुरक्षा कर्मी सांपला की गाडी भगा कर ले गए। किसानों ने वहां पूर्व मंत्री अनिल जोशी की गाडी रोक कर जोशी से किसानी कानूनों के संबंध में सवाल करने शुरू कर दिए। जोशी सडक पर ही किसानों के सवालों का जवाब देते रहे परंतु किसान संतुष्ट न हुए और भाजपा और उनके नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
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मलिका का भी किया किसानों ने विरोध
रेलवे स्टेशन अमृतसर  पर चल रहे सौदर्यीकरण  के कामों का जायजा लेनें पहुंचे राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक का किसान संगठनो ने पहुंच कर घेराव किया और नारेबाजी शुरु कर दी। नारेबाजी हर रहे किसानों को देखकर मलिक तुरंत रेलवे स्टेशन सुपरिटेंडेंट के कमरे में चले गए और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद काफी देर तक किसान संगठनों के सदस्य बाहर ही मलिक व मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। किसानो ने कहा कि उक्त नेता सब कुछ बेचने को लगे हुए है। रेलवे स्टेशन की भी नीलामी कर दी गई है। जिसे कभी बर्दाशत नहीं किया जाएगा। इसके बाद किसान संगठन प्लेटफार्म पर बैठ गए और काफी देर तक नारेबाजी करते रहे। थोड़ी देर के बाद मौके पर पहुंची थाना सिविल लाइन पुलिस किसान संगठनो के सदस्यों को गाड़ी में डालकर ले गए और वापिस श्वेत मलिक के घर बाहर छोड़ दिया।
— पंकज शर्मा

एजीपीसी के जरनल हाउस ने वर्ष 2021—22 के लिए 9 अरब 12 करोड़ 59 लाख का बजट किया पास

 अमृतसर

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एसजीपीसी ने  सर्व समिति से जैकारों की गुंज में वर्ष 2021—22 के लिए  9 अरब 12 करोड़ 59 लाख 26 हजार रूपए का बजट पास कर दिया। इस दौरान श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह , श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह , तख्त केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह , एसजीपीसी के अध्यक्ष बीबी जगीर कौर समेत 86 सदस्य मौजूद थे। बजट के दौरान स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2021—22 के दौरान अनुमानित आमदनी करीब आठ अरब 71 करोड़ 93 लाख 24 हजार के करीब होगी। यह बजट आमदनी से करीब 40 करोड़ 66 लाख रूपए अधिक खर्च वाला होने का अनुमान है। बजट एसजीपीसी के महासचिव एडवोकेट भंगवंत सिंह सियालका की ओर से  पेश किया गया।
एसजीपीसी की अध्यक्ष बीबी जगीर कौर ने कहा कि इस बार एसजीपीसी के बजट संबंधी पाई जारी काफी शंकाओं को खत्म किया गया है। पिछले बजटों में एक ही राशि को कई कई जगह जमा किया जाता था। जिस को खत्म किया गया है। इस से बजट की राशि में कमी आई है। संगत की ओर से चढ़ाई जाती राशि में से 30 प्रतिशत राशि अलग अलग विभागों के लिए एसजीपीसी का फंड में रूप में इकट्ठा होती है। परंतु पिछले समय के दौरान यह राशि दोबारा आमदनी में जमा होती रही है। जिस से बजट की रााि में बढ़ा अंतर पैदा हो जाता था। यह राशि एसजीपीसी के बजट और धर्म प्रचार में जमा हो जाती थी। इस बार बजट को संशोधित कर पेश किया गया है। क्योंकि बजट का बढ़ा हिस्सा संगत की ओर से चढ़ाई राशि से इकट्ठा होता है इस लिए सिर्फ अनुमानित बजटी ही पेश किया जाता है।आमदनी से खर्च अधिक है। कोरोना महामारी का भी बजट पर प्रभाव पड़ा है। एसजीपीसी की ओर से इस बार अपने खर्चों पर भी कटौती की गई है।
इतिहासिक गुरुद्वारों जिन की संभाल सेक्शन 85 के तहत की जाती है से वर्ष 2021 —22 के दौरान 6 अरब 47 करोड़ 25 लाख रूपए की आमदनी होने की संभावना है। जबकि खर्च अनुमान के अनुसार 6 अब 52 करोड़ 37 लाख रूपए है। संस्थान के शिक्षण संस्थान घाटे में चल रहे है। अधिक खर्च संगत के माध्यम से किए जा रहे है। एसजीपीसी को आरटीआई के माध्मय से पता चला कि पहले से ही वर्ष 1965 में श्री दरबार साहिब के लिए एटीजी मिल चुकी है। जिस का एसजीपीसी को भविष्य में और अधिक लाभ होगा और टैक्सों से छूट मिलेगी।  
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किस के लिए कितना बजट

— जनरल बोर्ड के लिए 7 करोड़ 80 लाख रूपए रखे गए।
— ट्रस्ट फंड के लिए 8 करोड़ 69 लाख दस हजार रखे गए
— शिक्षा के उपर दो करोड़ 76 लाख रखे गए
— धर्म प्रचार के लिए दस करोड़ रखे गए
— प्रिंटिंग प्रेसों के लिए आठ करोड़ 20 लाख 36 हजार रखे गए
— गुरुद्वारा साहिब सेक्शन 85 के लिए 6 अरब 52 करोड़ 37 लाख रखे गए है
— शिक्षण संस्थानों के लिए दो अरब 23 करोड़ आठ लाख 80 हजार रूपए रखे गए है।
— श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व को मनाने के लिए 14 करोड़ रूपए रखे गए।
— कुदरती आफतों के लिए रहत संबंधी 86 लाख रूपए रखे गए
— भेटा रहित गुरमति साहित्य प्रकाशित करने , धार्मिक परीक्षाएं , पत्रव्यवहार कोर्स और गुरमति विद्यालयों के लिए 27 करोड़ 31 लाख रूपए रखे गए।
—लड़कियों की खेल अकादमी के लिए 2 करोड़ रूपए
— सिकलीगर सिखों के लिए , राज्य के बाहर के गुरुद्वारों , धार्मिक , पंथक व समाज सेवी संस्थाओं के लिए 9 करोड़ 50 लाख रखे गए।
— अमृतधारी विद्यार्थियों के वजीफों के लिए 2 करोड़
— धर्मी फौजियों के लिए एक करोड़ रूपए
— धर्म अर्थ फंड के लिए 1 करोड़ 80 लाख रूपए


बजट के दौरान अलग अलग पदाधिकारियों भगवंत सिंह सियालका, सुखदेव सिंह भौर, बलविंदर सिंह बैंस, गुरप्रीत सिंह रंधावा, मिट्ठू सिंह , गुरचरण सिंह ग्रेवाल, बीबी किरणजोत कौर , बाबा गुरमीत सिंह त्रिलोकेवाला आदि ने अपने अलग अलग सुझाव पेश किए और पंथक मामलों पर विचार पेश करके एसजीपीसी को स्टेड स्पष्ट करने की मांग की।  इजलास के दौरान अरदास भाई सुलतान सिंह ने की ओर हुकमनामा मुख्य ग्रंथी हरिमंदिर साहिब ज्ञानी जगतार सिंह की ओर से लिया गया।
— पंकज शर्मा

आरएसएस खिलाफ पारित प्रस्ताव के बाद भाजपा व एसजीपीसी हुई आमने सामने

— भाजपा नेता आरपी सिंह के ब्यान को बताया गैर जिम्मेवारी वाला

—आरपी सिंह ने कहा एसजीपीसी सिखों के ईसाई धर्म में परिवर्तन होने की प्रक्रिया को रोकने में रही असफल
 अमृतसर
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बजट इजलास के दौरान आरएसएस के खिलाफ पास किए गए प्रस्ताव को लेकर भाजपा व शिरोमणि कमेटी के मध्य विवाद गहरा गया है। एसजीपीसी ने प्रस्ताव पारित किया है कि आरएसएस अल्पसंख्यकों के धर्म के अंदर हस्तक्षेप कर रही है। आरएसएस के हिन्दू राष्ट्र एजेंडा को केंद्र की सरकार लागू कर रही है। केेंद्र सरकार को चाहिए कि आरएसएस जैसे संगठनों की को एक राष्ट्र का एजेंडा लागू करने से रोके और इस संगठन को अपने दायरे में रह कर काम करने को यकीनी बनाए। एसजीपीसी की ओर से पास इस प्रस्ताव पर एक बहस शुरू हो गई है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से आरएसएस के खिलाफ पास किए प्रस्ताव में भाजपा के प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक टवीट जारी करके एसजीपीसी के इस प्रस्ताव की निंदा की है।
मामले को लेकर आरपी सिंह ने कहा कि एसजीपीसी पंजाब में सिखों को इसाई धर्म में कनवर्ट होने से रोक पाने में असफल सिद्ध हो रही है। जिस कारण लोगों का और सिखों का ध्यान इस मामले से हटाने के लिए एसजीपीसी आरएसएस के खिलाफ बेबुनियाद प्रस्ताव पारित करके एक नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर रही है। आज माझा के पठानकोट, तरनतारन , गुरदापुर और अमृतसर जिलों में बढ़ी संख्या में सिख ईसाई बन रहे है। धर्म परिवर्तन के लिए पैसे का भी लालच दिया जाता है। एसजीपीसी अपनी इस असफलता को छुपाने के लिए ही आरएसएस के खिलाफ गलत प्रचार कर रही है। परंतु आज तक आरएसएस ने किसी भी सिख को या किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को लालच देकर हिंदू नही बनाया। तो फिर कैसे कहा जा सकता है कि आरएसएस दूसरे धर्मों में हस्तक्षेप कर रही है। जबकि आरएसएस  ने पिछले समय के दौरान पंजाब में ईसाई बने लोगों को दोबारा अपने धर्म में वापिसी करवाई थी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार गुरदासपुर में ही 7.68 प्रतिशत जनसंख्या ईसाई बन गई। अमृतसर में 2.18 प्रतिशत और तरनतारन में 0.54 प्रतिशत जनसंख्या ईसाई बनी है। अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए ही हिन्दू राष्ट्र का डर पैदा किया जा रहा है।
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एसजीपीसी की अध्यक्ष बीबी जगीर कौर ने कहा कि इस में कोई शक नही है कि आरएसएस देश में अल्पसंख्यकों के धर्म में हस्तक्षेप करके उनको कमजोर कर रही है। एसजीपीसी ने आरएसएस के खिलाफ प्रस्ताव जो प्रस्ताव पास किया है वह सिख कौम की भावनाएं है। क्या सिख पंजाब में ईसाई बढ़ी संख्या में नही बने है इस पर बीबी जगीर कौर ने कहा कि इस संबंधी सारे आंकड़े इक्ट्ठे करके एसजीपीसी अपने अधिकारिक ब्यान जारी करेगी। केंद्र सरकार और भाजपा को आरएसएस के हिन्दू राष्र्ट की देश के अंदर स्थापित करने की योजना को लागू करने पर नुकेल डालनी चाहिए। और आरएसएस को अपने दायरे में रह कर काम करने के आदेश देने चाहिए।                                                          

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भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह का ब्यान गैर जिम्मेवारी वाला: एसजीपीसी

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से आरएसएस के खिलाफ दिए ब्यान पर भाजपा प्रवक्ता आरपी सिहं के प्रतिक्रम पर एसजीपीसी के एडिशनल सचिव सुखदेव सिंह भूरा कोहना ने आरपी सिह के ब्यान को गैर जिम्मेवारी वाला बताया है।
सुखदेव सिंह ने कहा कि आरपी सिंह इतिहास नही पढ़ा है इस लिए वह बेबुनियाद ब्यान दे रहे है। जब औरंगजेब ने भारत की धरती को इस्लाम की धरती बनाना शुरू किया तो धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी ने अपनी कुर्बानी दी। आज भाजपा और आरएसएस के राज्य में अल्पसंख्यक धर्म अपने आप को खतरे में महसूस कर रहे है। आजादी के बाद सत्ता में आई भाजपा आज भी अंग्रेजों की नीतियों पर चल औरंगजेब के शासन वाली योजना को लागू कर रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि औरंगजेब भारत का इस्लामी राष्र्ट बनाना चाहता था जबकि भाजपा देश को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती है। भाजपा दूसरे धर्मों के लोगों के सभ्याचार , भाषा आदि को सहन नही कर रही है। आज भी आरएसएस की ओर से सिख धर्म के इतिहास के साथ अप्रत्यक्ष रूप में छेड़छाड़ की जा रही है। आज कौम श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400 वर्षीय प्रकाश पर्व को मना रही है इस दौरान एसजीपीसी की ओर से आरएसएस के खिलाफ पास किया गया प्रस्ताव देश के संविधान के हित में है। एसजीपीसी सिख धर्म की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह प्रस्ताव सारी सिख कौम की सांझा आवाज है। जब भी कोई शक्ति एक धर्म के राष्ट्र के निर्माण की बात करके देश की एकता और अखंडता को भंग करने की कोशिश करेगी , अल्पसंख्यकों के लिए खतरा पैदा करेगी तो एसजीपीसी गुरु साहिबों की विचारधारा पर पहरा देते हुए उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करेगे।
— पंकज शर्मा

आरएसएस के खिलाफ पास प्रस्ताव हिन्दू सिखों में दरार पैदा करने की कोशिश: राम गोपल

— अकाली दल की साजिश का करेंगे तथ्यों के काउंटर

 अमृतसर
शिरोमाणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बजट इजलास में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ पास किए प्रस्ताव को लेकर राजनीति गर्माने लगी है। हिन्दू संगठन एसजीपीसी की पास किए प्रस्ताव के खिलाफ मैदान में आने लग पड़े है। एसजीपीसी के इस पास प्रस्ताव को अकाली दल बादल की ओर से राज्य के हालातों को दोबार खराब करने की कोशिश बताने के साथ हिन्दू व सिख भाईचारे में दरार पैदा कर सत्ता पर दोबारा काबिज होने की साजिश बताया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के धर्म जागरण प्राकोष्ठ के वरिष्ठ नेता व प्रवक्ता राम गोपाल ने कहा कि अकाली दल एक सुनियोजित राजनीति के तहत अपने सहयोगी संस्थान एसजीपीसी के माध्यम से आरएसएस के खिलाफ सिख समुदाय को करके अपनी कमजोरियों से सिख पंथ का ध्यान हटा कर दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और आने वाले विधान सभा चुनावों में राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए बेबुनियाद प्रस्ताव पारित करवा रहा है। सिख पंथ अकाली दल की सचाई को समझ चुका है। पिछले दिनों में अकाली नेतृत्व का गांवों में जाने से काफी विरोध लोगों ने किया था। यह विरोध अकाली दल की ओर से की जा रही रैलियों में दोबारा उभर कर सामने न आए इस लिए अपने पिछले पंथ व पंजाब विरोधी कामों से सिख पंथ का ध्यान हटाने के लिए एसजीपीसी के माध्यम से आरएसएस के खिलाफ प्रचार करवाया जा रहा है। जिस को किसी भी कीमत पर सफल नही होने दिया जाएगा।
राम गोपाल ने कहा कि अकाली दल का राजनीतिक इतिहास रहा है जब जब भी अकाली दल राजनीतिक तौर पर कमजोर हुआ है अकाली दल ने अपनी साख बचाने के लिए पंजाब के लोगों और पंथ को दिल्ली के खिलाफ करने के लिए झूठे मुद्दे पैदा करके उनको हवा दी है। अब फिर इसी तरह की साजिश हो रही है। इस के लिए अकाली दल एसजीपीसी और अकाल तख्त समेत अन्य तख्तों का सहारा लेकर सिख पंथ के अनुयाईयों की धार्मिक भावनाओं को अपनी सत्ता के हितों के लिए इस्तेमाल करता है। इस बार अकाली दल की यह साजिश पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। सोशल मीडिया पर आरएसएस और इसके सहयोगी संगठन एसजीपीसी की इस साजिश का पूरी तरह खुल कर जवाब दे रहे है। तथ्यों के साथ काउंटर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में हिन्दू सिख एकता भाईचारे और परिवारिक सांझ को अकालियों की सत्ता प्राप्ति के लिए किसी भी तरह प्रभावित नही होने दिया जाएगा। सिख पंथ को सब से अधिक खतरा ईसाई प्रचारकों से है। आज सीमांत गांवों में बढ़ी संख्या में सिख ईसाई बन चुके है यहा तक बहुत सारी ग्रामीण चर्च में केश व पगड़ी धारी पास्टर व प्रचारक बन चर्चों के प्रबंध  चला रहे है। आज तक सिखों के ईसाई बनने पर न तो एसजीपीसी ने कोई प्रस्ताव पारित किया और नही कभी अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने इस के खिलाफ ब्यान दिया। आरएसएस पंजाब में हिन्दू सिख भाईचारे को कभी नही टूटने देगी। अकाली दल की स्वार्थी राजनीति की हांडी को पंजाब के बहादुर लोक पकने नहीं देंगे।
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पंजाब के शांतिमय महौल को नहीं करने देंगे खराब: राज शर्मा
अखिल भारत हिन्दू महासभा के राज्य अध्यक्ष राज कुमार शर्मा ने कहा कि अकाली दल ने अपना वोट बैंक बढ़ाने व सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए एसजीपीसी के माध्यम से आरएसएस के खिलाफ प्रस्ताव पारित करवा कर राज्य के शांतिमय महौल को खराब करने की कोशिश की है। इस में अकाली दल को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिन्दूओं और सिखों को नाखून और मास का रिश्ता है। सत्ता के लिए इसे तोड़ने की अकाली दल की कोशिश को पंजाबी नाकार देंगे। पंजाब के हिन्दू परिवारों में शुरू से ही बड़े बेटे को सिख बनाया जाता था। एक ही परिवार में एक भाई हिन्दू और सिख होताा था। इस भाईचारे को पंजाब के लोग टूटने नहीं देंगे। इस के लिए अकाली दल को अखिल भारत हिन्दू महासभा मूंह तोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।
— पंकज शर्मा 

पीड़िता का अकाल तख्त को लिखा पत्र चड्ढा की क्लीन चिट के लिए बन सकता है मुश्किल

— पीडिता के पत्र ने किया स्पष्ट कानून की अदालत में चले रहे केस को प्रभावित करने के लिए क्लीन चिट के लिए चला है राजनीतिक हस्तक्षेप

 अमृतसर
सिखों के 118 वर्ष पुराने संस्थान चीफ खालसा दीवान के पूर्व अध्यक्ष चरणजीत सिंह चड्ढा को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से क्लीन चिट दे दी गई है। इस दी गई क्लीन चिट से न तो चड्ढा से पीड़ित दीवान के स्कूल की प्रिंसिपल संतुष्ट है। वहीं दीवान के सभी सदस्य और मौजूदा नेतृत्व के कई सदस्य भी इस फैसले को लेकर खुश नही दिखाई दे रहे है। अकाल तख्त साहिब के आदेशों के बाद पीड़िता की ओर से जत्थेदार अकाल तख्त साहिब को लिखा पत्र आने वाले समय में चड्ढा की दोष मुक्ति के लिए मुश्किल बन सकता है। दीवान में चर्चा है कि चड्ढा को क्लीन चिट कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते मिली है। जबकि दूसरी और चड्ढा को क्लीन चिट दिए जाने पर पीड़िता ने अकाल तख्त साहिब की ओर से किए गए न्याय पर भी सवाल खड़े कर दिए है।
दीवान के एक स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल जो चड्ढा से पीड़ित थी और जिस के साथ अश्लील हरकतें किए जाने की चड्ढा की वीडियो वायरल हुई थी , उसने अकाल तख्त साहिब के कार्यवहाक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि उसका पक्ष सुने बिना ही अकाल तख्त साहिब की ओर से चड्ढा को दोष मुक्त कर देना पक्षपात वाला फैसला है। जबकि इस मामले को लेकर अभी केस अदालत में विचाराधीन है।
जबकि चड्ढा के पक्ष वाले दीवान के सदस्यों का कहना है कि चड्डा को वर्ष 2018 में अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने आदेश जारी करके उनकी समाजिक, राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियों के नेतृत्व पर रोक लगा दी थी। यह रोक दो वर्षों के लिए लगाई गई थी। अब दो वर्ष पूरे हो गए है। जिस को मुख्य रख चड्ढा ने अकाल तख्त साहिब को दो अलग अलग बाद पत्र लिख उनके मामले पर विचार करने की अपील की थी। रोक का समय समाप्त होने के कारण चड्ढा को दोषों से अकाल तख्त साहिब की ओर से मुक्ति मिली है।
पीड़िता ने पत्र में जिक्र किया है अकाल तख्त का फैसला सुन कर उसे बहुत दुख हुआ है। पांच सिंह साहिब को चड्ढा के सबंध में कोई भी फैसला लेने से पहले उनकी भी सुनवाई करनी चाहिए थी। अपन पक्ष रखने के लिए पीड़िता ने कई बार अकाल तख्त को पत्र भेजे। परंतु अकाल तख्त साहिब की ओर से उसे एक बार भी पक्ष रखने के लिए बुलाया नहीं गया। उसने कहा कि चड्ढा से दोषों से मुक्त होने के लिए अकाल तख्त को गुमराह किया है। यह मामला अभी कानून की अदालत में चल रहा है। वहां से चड्ढा को दोषों से कोई मुक्ति नही मिली है। माननीय जज कमल वरिंदर की अदालत में चल रहे केस संबंधी अदालत ने 24 फरवरी को चरणजीत सिंह चड्ढा के खिलाफ गवाहीयां करवाने के हुक्म दिए है। जिस की अगली तिथि 13 मई 2021 है।पीड़िता से जत्थेदार को अपने पत्र में यह भी कहा है कि चड्ढा की गतिविधियों के कारण वह पिछले तीन वर्षों से मानसिक परेशानी झेलते हुए समाजिक तौर विचारने के लिए संघर्ष कर रही है। अकाल तख्त साहिब की ओर से चड्ढा का दी गई दोषों से मुक्ति मेरे कानून की अदालत में चले रहे केस को प्रभावित कर सकती है। लगता है एक आदेश एक सुनियोजित राजनीति से जारी करवाया गया है। उसने यह भी अपील जत्थेदार से की है कि चड्ढा को दोषों से मुक्ति देने वाला अकाल तख्त साहिब के आदेशों पर रोक लगाई जाए जब तक कानून की अदालत से कोई फैसला नही हो सकता। वैसे भी जो मामले अदालतों में चल रहे होते है उन मामलों पर कभी भी अकाल तख्त साहिब की ओर से फैसले नहीं सुनाए जाते और कानून की अदालत के फैसलों के बाद ही अकाल तख्त की ओर से मुद्दों पर फैसले सुनाए जाते रहे है।
— पंकज शर्मा

नानकशाही कैलेंडर ने पूर्ण रूप में सिख पंथ को रखा है दो हिस्सा में बांट कर

— एसजीपीसी के महासचिव भी कैलेंडर मामले पर रखते है एसजीपीसी के अध्यक्ष से विचारों से अलग लाईन

पंकज शर्मा , अमृतसर
सिख पंथ में नानक शाही कैलेंडर को लागू करने का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सिख पंथ के अंदर यहां रेडिकल ग्रुप मूल नानक शाही कैलेंडर को लागू करने के पक्ष में वहीं कुछ संगठन और एसजीपीसी संशोधित नानक शाही कैलेंडर को लागू करने का समर्थन करते है। जबकि पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी मूल नानक शाही कैलेंडर के आधार पर ही सिख गुरु साहिब के पवित्र दिन मनाती है। जबकि एसजीपीसी संशोधित नानक शाही कैलेंडर के अनुसार गुरु साहिब के दिन त्योहार मनाती है। इसके चलते कई बार कुछ दिन एक वर्ष में दो—दो बार आ जाते है। जिस से सिख पंथ के अंदर पवित्र दिन मनाने को लेकर दुविधा पैदा हो जाती है।
अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने गत रविवार को संशोधित नानक शाही कैलेंडर श्री अकाल तख्त साहिब के रिलीज करके सिख पंथ को इस कैलेंडर के अनुसार पवित्र दिन मानने का आह्वान किया गया था। यह कैलेंडर एसजीपीसी की ओर से तैयार किया गया था।
मंगलवार को रेडिकल सिख संगठन दल खालसा ने नेताओं और वर्करों ने भी नानक शाही कैलेंडर श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास करने के बाद रिलीज किया। जोकि मूल नानक शाही कैलेंडर था। उन्होंने ने भी सिख पंथ को मूल नानक शाही कैलेंडर के अनुसार सिख गुरुओं के पवित्र दिन मूल नानक शाही कैंलेडर के अनुसार मनाने का आह्वान किया। एसजीपीसी के कुछ पदाधिकारी और अध्यक्ष यहां संशोधित नानकशाही कैलेंडर के पक्ष में है वहीं एसजीपीसी के महासचिव करनैल सिंह पंजौली मूल नानकशाही कैलेंडर के पक्ष में है।जिस के चलते नानकशाही कैलेंडर को लेकर सिख पंथ में विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे है। पंजौली संशोधित नानक शाही कैलेंडर रिलीज करने के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे थे जिस में अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कैलेंडर जारी किया था। परंतु दल खालसा की ओर से रिलीज किए मूल नानक शाही कैलेंडर के कार्यक्रम में पहुंचे। इस दौरान दल खालसा ने एक ज्ञापन भी पंलौजी को सौंपा जिसमें मांग की गई कि सिख कौम अपनी अलग पहचान मूल नानक शाही कैलेंडर को अपनाए नाकि संशोधित नानक शाही कैलेंडर को अपनाया जाए। दल खालसा के के नेता कवंरपाल सिंह बिट्टू दावा है कि संशोधित नानक शाही कैलेंडर बिक्रमी कैलेंडर का दी दूसरा रूप है।
उधर एसजीपीसी के महासचिव करनैल सिंह पंजौली ने कहा कि वे मूल नानक शाही कैलेंडर को एसजीपीसी की ओर से स्वीकार किए जाने का मामले एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के ध्यान में लाया जाएगा और एसजीपीसी की कार्यकारिणी कमेटी में भी यह मामला उठाया जाएगा कि संशोधित नानक शाही कैलेंडर की जगह मूल नानक शाही कैलेंडर को स्वीकार किया जाए।
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क्या है नानकशाही कैलेंडर विवाद सिख पंथ में

कुछ वर्षों से सिख पंथ में रेडिकल व कुछ अन्य ग्रुप सिख पंथ को अलग कौम बताते आ रहे है। इस की पहचान भी अलग है इस पर चर्चा करते है। इसी के चलते कहा जा रहा है कि अगर सिख एक अलग कौम है तो इस का कैलेंडर भी अलग होना चाहिए। जिस के चलते विदेश में रहने वाले एक सिख पाल सिंह पूरेवाल ने वर्ष 2003 में एक कैलेंडर तैयार करके एसजीपीसी के माध्यम से जारी करवाया गया। जो कि सूर्य गति के आधारति था। पहले सिख पंथ में चद्रमां की गति पर आधारित बिक्रमी कैलेंडर के अनुसार ही प्रत्येक त्योहार व धार्मिक दिन आयोजित किए जाते थे।
पंरतु सिख पंथ में दमदमी टकसाल मेहता की अगुआई वाले सिख संत समाज ने पाल सिंह पूरेवाल के कैलेंडर में कई दोष निकाल कर संशोधित नानक शाही कैलेंडर एसजीपीसी को जारी करने के लिए वर्ष 2010 में कहा। एसजीपीसी ने पूरेवाल के मूल नानक शाही कैलेंडर में कुछ संशोधन करके संशोधित नानक शाही कैलेंडर रिलीज कर दिया। इस के बाद भी संशोधित नानक शाही कैंलेंडर में कुछ तुरूटियां रह गई। जो समय समय पर दिन त्योहारों को लेकर विवाद बनती थी। सिख संत समाज ने दोबारा इस बर संशोधित करवा कर वर्ष 2015 में एसजीपीसी से दोबारा सांशोधित किए गए नानकशाही कैलेंडर को रिलीज करवाया। तभी से लेकर मूल नानक शाही कैलेंडर और संशोधित नानक शाही कैंलेडर को लेकर सिख पंथ में विवाद बना हुआ है।
दल खालसा के नेता परमजीत सिंह मंड कहते है अगर सिख अलग धर्म है तो फिर सिखों को कैलेंडर भी मूल नानक शाही अलग होना चाहिए। उसमें बिक्रमी कैलेंडर को मिक्स नहीं करना चाहिए। जो कि एसजीपीसी करके रिलीज हर वर्ष करती है।
— पंकज शर्मा 

सीकेडी के अब तक 14 प्रधान, 40 साल बाद सियासी नेता के हाथ में दीवान की कमान

अमृतसर

सिख धर्म की सब से पुरानी शैक्षिणिक व धर्म प्रचार करने वाली संस्था चीफ खालसा दीवान की स्थापना 120 साल पहले 1902 में हुई थी। दीवान के अब तक 13 प्रधान रहे और गत मंगलवार काे डा इंद्रबीर सिंह निज्जर 14वें प्रधान बनें हैं।
दीवान के पहले प्रधान भाई अर्जन सिंह बागड़ीया बने थे जाे 1902 से 1919 तक प्रधानगी पद पर रहे। सिख शैक्षिणिक संस्था सीकेडी के इतिहास में 40 साल बाद फिर काेई सियासी नेता प्रधान बना है। दीवान के 8वें प्रधान कृ़पाल सिंह सियासी नेता थे जाे विधायक व सांसद भी रहे। कृपाल सिंह 1982 में प्रधान बने थे और 2002 तक 20 साल लगातार दीवान के प्रधान रहे। उसके बाद काेई ऐसा प्रधान नहीं आया जाे प्रधान के साथ साथ विधायक या सांसद भी हाे।
वर्ष 2002 से 2004 तक हरमिंदर सिंह कार्यकारी प्रधान रहे। चरनजीत सिंह चड्ढा 2004 से 2017 तक प्रधान रहे। हालाकि चड्ढा की सियासत में अच्छी पकड़ थी लेकिन वह सियासी नेता नहीं थे। उसके बाद धन्नराज सिंह दाे बार कार्यकारी प्रधान रहे। डा संताेख सिंह केवल छह महीने के लिए ही प्रधान रहे। उनका कार्यकाल मार्च 2018 से सितंबर 2018 तक प्रधान रहे। उसके बाद 2019 से मार्च 2022 तक निर्मल सिंह प्रधान रहे। इनका भी सभी सियासी पार्टीयाें के नेताओं के से अच्छा संपर्क था लेकिन सीधे ताैर पर वह सियासत में शामिल नहीं थे। माैजूदा प्रधान डा इंद्रबीर सिंह निजर अभी 10 मार्च काे  ही आम आदमी पार्टी से  विधायक विजयी हुए है। उनकों पांच दिन बाद मंगलवार 15 मार्च काे दीवान के कार्यवाहक अध्यक्ष सर्व समिति से चुन लिया गया है। इसी दाैरान 16 मार्च बुधवार काे उन्हें विधान सभा का प्राेटैम स्पीकर बना दिया गया। अब देखना यह हाेगा कि वह तीनाें पदाें काे एक साथ कैसे निभा पाते हैं।
— पंकज शर्मा

हरिमंदिर साहिब में भी संगत मनाती है पुष्प होली खेल कर होल्ला मोहल्ला

पंकज शर्मा , अमृतसर

खालसाई उत्साह से हरिमंदिर सााहिब में भी मनाया जाता है होला-मोहल्ला
श्री हरिमंदिर साहिब में मोहल्ला पर उमड़ते है श्रद्धालु, पवित्र सरोवर में भी लगाई जारी है श्रद्धालुाओं की ओर से डुबकी।
वैसे तो आनंदपुर साहिब का होला मोहल्ला विश्व प्रसिद्ध है। परंतु जो श्रद्धालु आनंदपुर साहिब नहीं पहुचं पाते वह श्री हरिमंदिर साहिब में मोहल्ला के अवसर पर अपनी धार्मिक श्रद्धा प्रगट करते है। हरिमंदिर साहिब में मोहल्ला का त्योहार पुराने समय से ही मनाया जाता चला आ रहा है। 
 विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल श्री हरिमंदिर साहिब में खालसाई परंपरा, उत्साह और उमंग के साथ फूलों और इत्र से होला-मोहल्ला मनाया जाता। होला मोहल्ला मनाने के लिए देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचते है। श्रद्धालुओं  पवित्र सरोवर में डुबकी लगाते है और श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सामने अरदास करते है। 
सूरज ढलने के बाद रात्रि को श्री गुरु ग्रंथ साहिब को मनमोहक पालकी साहिब में सुशोभित कर सुख आसन के लिए सत नाम वाहेगुरु के जाप के साथ श्री अकाल तख्त साहिब में स्थित कोठा साहिब में ले कर जाया जाता है। तब परिक्रमा में खड़े लाखों श्रद्धालुओं की ओर से  गुलाब के फूलों और इत्र का छिड़काव किया जाता है। मोहल्ले वाले दिन यह यह बहुत ही सुंदर व मनमोहन नजारा होता है । इस दौरान रात तक श्रद्धालु परिक्रमा में पाठ करते रहते है। 
संगत की ओर से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी पर गुलाब के फूलों की वर्ष की जाती है  था। संगत की ओर से  पुष्प होली के दौरान अलग-अलग खुशबू वाले सेंट से वातावरण को सुगंधित बना दिया जाता है। ऐसे प्रतीत होता है कि   जैसे सारे वातावरण में अलग-अलग फूलों की खुशबू वाली हवाएं चल रही हों। इस नजारे को देखने के लिए संगत सुबह से लेकर देर रात्रि तक श्री हरिमंदिर साहिब की परिक्रमा में बैठकर इंतजार करती रही। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का जब श्री हरिमंदिर साहिब में प्रकाश किया गया था तब से ही यह परंपरा श्रद्धालुओं की ओर से गुरु साहिब के मान सम्मान में शुरू की गई थी। क्योकि सिख धर्म में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सच्चे पातशाह व राजा महाराजाओं से भी उपर का दर्जा दिया गया है। संगत उनसे आशीर्वाद लेने के लिए यह पुष्प होली , होला महल्ला वाले दिन हरिमंदिर साहिब में भी मनाती है।