Wednesday, November 11, 2020

पूर्व जत्थेदार रणजीत सिंह लोगोंवाल व जत्थेदार हरप्रीत सिंह जवाब लेने समर्थकों साथ पहुंचे गोल्डन प्लाजा

— बादल परिवार को सिख पंथक संस्थाओं से बाहर करने का किया अह्वान

 अमृतसर
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पुरातन हस्त लिखित स्वरूपों, हुकमनामों और गायब हुए 328 स्वरूपों की जानकारी देने की मांग को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह अपने समर्थकों के साथ श्री हरिमंदिर साहिब के बाहर स्थित गोल्डन प्लाजा पहुंचे। जत्थेदार रणजीत सिंह ने एक दस दिन पहले श्री अकाल तख्त साहिब  के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल को पत्र लिख कर कहा था कि वह 7 नवंबर को संगत के साथ गोल्डन प्लाजा पहुचेंंगे और प्रश्नों का जवाब दोनों पंथक नेताओं से मांगेंगे। परंतु संगत का कोई भी जवाब देने के लिए जत्थेदार हरप्रीत सिंह ओर गोबिंद सिंह लोगोंवाल शाम तीन बजे तक नही पहुंचे। इस के बाद संगत को संबोधित करते हुए भाई रणजीत सिंह ने बादल दल का गांवों में पूर्ण बायकाट कर सिख संस्थाओं में से बादल दल के प्रतिनिधियों को बाहर का रास्ता दिखा पंथ और ग्रंथ दोनों की रक्षा करने का अह्वान किया। आरोप लगाए कि बादल परिवार को बचाने के लिए गायह हुए 328 स्वरूपों संबंधी असली जांच रिपोर्ट को ज्ञानी हरप्रीत सिंह , गोबिंद सिंह लोंगोवाल और जांच करने वाले एडवोकेट इशर सिहं ने तख्त दमदमा साहिब में बदल दिया। एसजीपीसी ने जो रिपोर्ट सर्वजनक की है वह बदली हुई रिपोर्ट है।
सुबह भाई रणजीत सिंह अपने करीब 2 हजार से अधिक समर्थकों के साथ गुरुद्वारा फूला सिंह बुर्ज से मार्च करते हुए श्री हरिमंदिर साहिब के बाहर स्थित गोल्डन प्लाजा पहुचे। सुबह 11 बजे से लेकर शाम तीन बजे तक संगत के सवालो का जवाब देने के लिए जत्थेदार रणजीत सिंह अपने समर्थकों समेत लोगोंवाल और जत्थेदार हरप्रीत सिंह सतनाम वाहेगुरू का जाप करते हुए इंतजार करते रहे।
संगत को संबोधित करते हुए रणजीत सिंह ने कहा कि अप्रेशन ब्लू स्टार के दौरान जो अनमोल खजाना, हस्त लिखित स्वरूप, गुरु साहिब के 28 से अधिक हुकमनामे, विभिन्न स्वरूप आदि सेना ले गई थी वह सारा समान सेना और भारत सरकार ने एसजीपीसी को समय समय पर वापिस कर दिया। परंतु अभी तक एसजीपीसी ने संगत को बताया ही नही है कि यह अनमोल खजाना कहां है। इस संबंधी अदालत में चल रहा केस भी एसजीपीसी हार चुकी है। अब हाल में ही गायब हुए प्रिंटिंग 328 स्वरूपों की जानकारी भी एसजीपीसी संगत को नही दे रही है। जो जानकारी मांगता है उसे टास्क फोर्स ने पिटवाया जा रहा है। मामले के संबंध में जो जांच ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने दोस्त एडवोकेट इशर सिंह करवाई है उस असल रिपोर्ट को भी सर्वजनक नही किया गया। बल्कि तैयार की गई दूसरी डूप्लीकेट रिपोर्ट को सर्वजनक किया गया है। असली रिपोर्ट की एक कापी उनके पास भी है। जिस के हर पन्ने पर इशर सिंह को हस्ताक्षर है। पंरतु जो रिपोर्ट एसजीपीसी ने सर्वजनक की उसके सिर्फ आखरी पन्ने पर ही इशर सिंह के हस्ताक्षर है। जत्थेदार रणजीत सिंह ने कहा एसजीपीसी श्री हरिमंदिर साहिब और गुरुद्वारा शहीदां साहिब व कडाह प्रसाद की अमादनी का गलत उपोग कर रही है। गुरुद्वारा साहिबों की आमदनी के खर्च को गलत ढंग से उपयोग में लाया जा रहा है। एसजीपीसी के 400 कर्मचारियों को अकाली नेताओं और एसजीपीसी के अधिकारियों के निजी कामों पर तैनात करके गुरू की गोल्क पर बोझ डाला गया है। कहा कि संगत हर हाल में एसजीपीसी और अकाली दल बादल के नेताओं से गायब पंथक खजाने का हिसाब मांगेगी। आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक बादल दल को सिख धार्मिक संस्थाओं से बाहर नहीं कर दिया जाता। कहा किे वह इस आंदोलन को और तेज करने के लिए जल्दी ही भविष्य की रणनीति का एलान करेंगे। इस दौरान उनके समर्थन में अकाली दल डेमोक्रेटिक, श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी, एसजीपीसी के विपक्ष के आधी दर्जन से अधिक सदस्य, अकाली दल बादल के निराश कार्यकर्ता आदि भी मौजूद थे।
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उधर एसजीपीसी ने जत्थेदार रणजीत सिंह की ओर से किए गए प्रदर्शन व पेश किए गए तथ्यों को गलत बताया है। एसजीपीसी के प्रवक्ता कुलविंदर सिहं रमदास ने कहा कि अपने प्रदर्शन के दौरान गल्त तथ्य पेश करके कौम के अंदर दुविधा पैदा करने की कोशिश की है। एसजीपीसी का काम काज पूरी तरह पारदर्शी है। पावन स्वरूपों संबंधी ब्यानबाजी झूठी है। गायब स्वरूपों संबंधी हुई जांच में दोषियों को सजा दी जा चुकी है। रणजीत सिंह गुरुद्वारा साहिब में रोजाना चढावे को लेकर भी गल्त तथ्य पेश किए है। जबकि एसजीपीसी के 40 के करीब गुरुद्वारों की आम दिनों में हर माह का चढावा करीब 12 करोड़ रूपाए है। सभी गुरुद्वारों का रोजाना का चढावा 40 लाख है। कोरोना के प्रभाव के कारण यह अब कम हुआ है। कडाह प्रसादर की रोजाना आमदनी करीब 12 लाख है। वही यह भी गलत है कि 400 के करीब एसजीपीसी कर्मी नेताओं ने निजी कामों पर तैनात किए है। कहा कि भाई रणजीत सिंह गलत ब्यान देकर सिखों को खानाजंगी की तरफ धकेल रहे है। रणजीत सिहं निजी लाभ लेने के लिए ऐसा कर रहे है।
— पंकज शर्मा

भारत पाक के आपसी संबंधों का मधुर बनाने में सार्थक सिद्ध होगा श्री करतारपुर साहिब का कोरिडोर


अमृतसर
गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के  लिए भारत व पाकिस्तान सरकारों की ओर से संगत के लिए रास्ता खोलना एक इतिहासिक फैसला है। यह रास्ता दोनों देशों के मध्य आपसी भाईचारा व प्रेम बढाने वाला रास्ता है। इस रास्ते के खुलने से दुनिया भर के सिखों में खुशी की लहार पैदा हुई। यह रास्ता एशिया के इस भूभाग में अमनशांति का संदेश देना वाला है वहीं यह दुनिया भर के सिखों को अपने गुरु साहिब के पावन स्थान के दर्शन करने के लिए आने जाने की सुविधा देना वाला एक इतिहासिक रास्ता है। यह रास्ता आने वाले समय में भारत पाक के रिशतों में यहा अधिक मजबूरी और मधुरता लाएगा वहीं दोनों देशों के लोगों में आपसी भाई चारे को मजबूत करने वाला सिद्ध होगा। करतारपुर का कोरिडोर खुलने से वह सिख संगत भी असानी से अपने गुरु साहिब के साथ संबंधित स्थान के दर्शन कर सकेगी जो संगत करतारपुर साहिब के दर्शन करना चाहती थी परंतु कई तरकनीकी कारणों के कारण दर्शन करने से वंचित रह जाती थी। यह रास्ता धार्मिक सद्दभावना को बढावा देने वाला है और दुनिया भर में रहने वाले सिखों को अपने मुकदस धार्मिक स्थान के दर्शनों की प्यास बुझाने वाला है। दुनिया भर से लाखों सिख श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक होने के लिए आते है। भारत में यहां वह अलग अलग तख्त साहिबों के दर्शन करते है वहीं उनकी यह भी इच्छा रहती थी कि वह पाकिस्तान स्थित गुरु साहिब के साथ संबंधित स्थानों के भी खुले दर्शन दीदार कर सकें। यह कोरिडोर दुनिया भर के करोडों सिखों की अध्यात्मिक  इच्छा पूर्ती करने वाला एतिहासिक रास्ता है।
सिख संगत वर्षों से अपने गुरुघामों के खुले दर्शन दीदार के लिए अरदास करती आ रही है। वाहेगुरु की मेहर के चलते सिख संगतों की आवाज पर दोनों देशों की सरकारों ने कोरिडोर खोलने का फैसला लिया जिस का दुनिया के हर सिख ने स्वागत किया है। दोनों देशों की सरकारों को चाहिए कि सिख कौम की धार्मिक भावनाओं को मुख्य रखते हुए इस रास्ता के माध्यम से संगत के आने व जाने के लिए वीजा व अन्य शर्तों को और अधिक नरम करना चाहिए। वहीं इस करतार पुर साहिब जाने के लिए फीस को भी नामात्र ही करना चाहिए। ताकि हर सिख माई भाई अपने गुरु साहिब के साथ संबंधित पवित्र स्थान करतारपुर साहिब के दर्शन कर सके। समय समय पर कुछ कारणों से जब रास्ता बंद होता है वह भी बंद नही होने चाहिए। इस के लिए दोनों देशों की सरकारों को कोई ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि रास्त बंद करने की जरूरत न पडे । संगत अधिक से अधिक संख्या में इस रास्ता के माध्यम से धार्मिक स्थानों के दर्शन कर सके। इस की भी ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। संगत की सुविधा के मौके पर ही आने जाने की सुविधा हो। अगर दोनो देशों की सरकारें अधिक से अधिक सुविधाएं इस रास्ते के माध्यम से संगत को प्रदान करती है तो यह रास्ता एक शांति व आपसी भाईचारे व संबंधों को मजबूत बनाने वाला रास्थ भविष्य में साबित होगा। जिस से दोनों देशों के आपसी संबंधों का सुनहरा इतिहास लिखा जा सकेगा।
— भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल
अध्यक्ष
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी